कफन

महान कथाकार प्रेमचंद की एक अद्भुत कहानी है कफन  जिसे 
पढ़कर समझ आता है कि मौत गरीबी से बढ़कर नहीं होती है।
कथा के शुरूआत में जब बुधिया जाड़े की रात में अपने घर में प्रसव पीड़ा से छटपटाती है तो उसका पति और ससुर उसके कष्ट से बेपरवाह होकर आग में मीठे आलू भुनकर खा रहे होते है और अंत में जब वह मर जाती है तो उसके लिए कफन के पैसे लोगों से मांगकर फिर उस कफन के पैसे से खुद भर पेट भोजन करते हैं और शराब पीते हैं। कहानी में लेखक धीसू और माधव के जरिए गरीबी और भूख के कारण हुए मनुष्य के नैतिक पतन को भली-भांति परिचित कराते हैं। कहानी के माध्यम से हमें यह भी समझ आता है कि अगर मनुष्य को मूलभूत सुविधाएं जैसे खाना कपड़े भी न मिले तो ऐसे प्राणी के लिए मृत्यु भी तुच्छ लगती है। 




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